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रण्थमभौर दुर्ग सवाईमाधोपुर राजस्थान ranthanbhore fort SAWAI MADHOPUR Rajasthan, रण्थमभौर अभ्यारण ranthanbhore century

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  रणथम्भौर दुर्ग (गिरि एवं वन दुर्ग), सवाईमाधोपुर रणथम्भौर का दुर्ग सवाईमाधोपुर से लगभग 9 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत मालाओं से घिरा हुआ एक पार्वत्य दुर्ग एवं वन दुर्ग है। इसका निर्माण आठवीं शताब्दी में अजमेर के चौहान शासकों द्वारा करवाया गया था। एक मान्यता अनुसार इसका निर्माण रणथान देव चौहान ने करवाया था। यह दुर्ग विषम आकार वाली सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है। अबुल फजल ने लिखा है कि 'अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है। बीच-बीच में गहरी खाइयां और नाले हैं। ये सारे नाले चम्बल एवं बनास नदियों में जाकर मिलते हैं। रणथम्भौर दुर्ग ऊंचे गिरि शिखर पर बना हुआ है। इस तक पहुंचने के लिये संकरी घुमावदार घाटियों से होकर जाने वाले मार्ग से गुजरना पड़ता है। नौलखा दरवाजा (प्रवेश द्वार) , हाथी पोल, गणेश पोल, सूरज पोल, और त्रिपोलिया (अंधेरी दरवाजा) को पार करके दुर्ग में पहुंचा जाता है। इसके पास से एक सुरंग महलों तक गयी है। दुर्ग परिसर में हम्मीर महल, रानी महल, हम्मीर की कचहरी, सुपारी महल, बादल महल जौरां-भौरां, 32 खम्भों की छतरी, रनिहाड़ तालाब, जोगी महल, पीर सदरूद्दीन की दरगाह, लक्ष्मी नारा...