पांचना/पांचणा बांध नहर करौली राजस्थान panchana dam canal/panchana Nahar karuli Rajasthan


पांचना बांध

राजस्थान के करौली जिला के गुड़ला गाँव में स्थित पांचना बांध मिट्टी से निर्मित बांध है पांच नदियों (भैसाबर,भद्रावती ,अटा,मांची,और बरखेड़ा नदी ) के संगम पर बने होने के कारण इस बांध का नाम पांचना पड़ा।
पांचना मिट्टी से बना राज्य का सबसे बड़ा बांध है। इसे अमेरिका के आर्थिक संयोग से बनाया गया है पांचना बांध से करौली , सवाईमाधोपुर के मांड क्षैत्र और भरतपुर के बयाना क्षैत्र के आसपास के गांवों में जलापूर्ति  होती हैं 

 पांचना बांध का निर्माण मांड क्षैत्र के जलसंकट को दूर करने और वहां के जीवनस्तर में सुधार लाने  के लिए किया गया था क्योंकि अरसों से मांड में जलसंकट बना हुआ था जलस्तर इस तरह प्रभावित था कि जमीनी फ्लोराइड युक्त पानी क्षैत्र के लोगों और कृषि के लिए उपयोग करना पड़ता था इसलिए  वर्ष 1980के आसपास (अनुमानित वर्ष1978) में गुडला गांव में पांच नदियों के संगम पर अमेरिका के आर्थिक सहयोग प्राप्त करके इसका निर्माण हुआ  तथा लगभग 10बर्षो के निर्माणकाल के पश्चात नहरों के माध्यम से लगभग 1990के आसपास मांड क्षैत्र के कमांड एरिया (35 गांवों ) को पांचना का पानी सिंचाई उपयोग के लिए प्राप्त हुआ । पानी की आवक से कमांड क्षेत्र को कृषि क्षैत्र के में सुधार आया तथा क्षैत्र के जल स्रोतों में जलस्तर बढ़ने लगा ।


कमांड एरिया में नहर ना आने से पूर्व इस बड़े भू-भाग भीषण जलसंकट गहरा रहा था। पांचना नहर ने कमांड क्षेत्र के लिए अमृत धारा का काम किया । पांचना नहर से पानी मिलने के बाद कमांड क्षेत्र की महज एक दशक में ही सूरत ही बदल गई। नहर से पानी मिलने के बाद यहां के किसान की अरसों  से बंजर पड़ी भूमि हरे भरे खलियानों में तब्दील हो गई।

 पांचना नहर के पानी से कमांड क्षेत्र में  आर्थिक उन्नति के साथ सामाजिक जीवन में बदलाव हुआ।

सबकुछ ठीक ही चल रहा था क्षैत्र के लोगों में लहलहती फसलों को देखकर आंखों की चमक ठंडी नहीं पड़ी की बर्ष 2006 में राजस्थान सरकार ने पांचना नहर को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया । कमांड एरिया के किसानों की मांग एवं अनेकों कोशिशों के बाद भी लगभग 15 वर्षों से नहर नहीं खुली अर्थात् नहर बंद रही।

वर्तमान में नहर बंद होने की बजह से कमांड एरिया के किसान बुरी तरह प्रभावित है युवा पीढ़ी मजबूरन रोजगार और खेती के अभाव में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रही है 

पांचना नहर बंद होने का प्रभाव ना केवल किसानों पर बल्कि क्षैत्र के पशु पक्षियों पर भी दिखाई दे रहा है पशुओं की संख्या में प्रतिवर्ष कमी को आंका जा सकता है ।

पांचना नहर बंद होने की बजह से कमांड क्षेत्र की लगभग 1.25लाख की जनसंख्या का जीवन प्रभावित हुआ है तथा  लगभग 40हजार वीघा जमीन असिंचित पड़ी है तथा क्षैत्र को लगभग 1400करोड रुपए की आर्थिक हानि उठानी पड़ी है 



पांचना नहर का पानी करौली और सवाई माधोपुर जिले के अधिकांशतः गांवों के जमीन की प्यास बुझाता है। करौली जिले के नादौती, टोडाभीम , महावीर जी ,हिण्डौन क्षैत्र के 23 गांव बांध से निकली नहरों का पानी इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही सवाईमाधोपुर की गंगापुर एवं वजीरपुर तहसील के 24 गांवों में भी पांचना की नहरों का पानी पहुंचता था। इन गांवों के किसान सिंचाई के लिए इसी बांध पर निर्भर हैं। पांचना बांध की कुल जल भराव क्षमता 59.45 मिलियन क्यूबिक मीटर है। इस साल अच्छा मानसून होने से बांध अभी अपनी भराव क्षमता की चरम सीमा पर है

लेकिन ना केवल प्रशासनिक कारण बल्कि जातिवाद भी पांचना नहर नही  खुलने का सबसे बड़ा कारण है इस बीच लगभग 15 सालों से बंद पड़ी नहर पूरी तरह जर्जर हो चुकी है अतः ना केवल नहर खुलना बल्कि नहरो की मरम्मत भी आवश्यक है 

जातिय मनमुटाव के फलस्वरूप गुर्जर समाज पांचना बांध के पानी पर अपना हक समय समय पर जताता रहा है गुर्जर समाज का मानना है कि पांचना के पानी पर पहले उनका हक है पहले उनको पानी की आपूर्ति की जाये क्योंकि पांचना बांध के आसपास के अधिकांशतः गांव गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र है 

इस मांग के बाद 2011मे लगभग 14(13.21) करोड की लागत से गुडला लिफ्ट परियोजना बनी ताकि बंचित गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र में जलापूर्ति हो सकें 

परन्तु दशकों बाद भी लिफ्ट परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण होने पर भी दोनों पक्षों में आपसी सहमति का अभाव बना हुआ है 



 समाज विशेष की हठधर्मिता के फलस्वरूप  केवल 50हजार की आबादी को जलापूर्ति के लिए कमांड क्षेत्र की 1.25 लाख की आबादी की जलापूर्ति रोकना शायद समझदारी का परिचायक नहीं होगा ।

जबकि सरकार ने बंचित 50हजार गुर्जर बाहुल्य क्षैत्र के लिए योजनाबद्ध तरीके से जलापूर्ति के लिए प्रयासरत हैं फिर भी कमांड क्षेत्र के साथ नाइंसाफी क्यों ?

जलसंकट ना केवल कमांड क्षेत्र के 35 गांवों पर गहरा रहा है बल्कि आसपास के 12 अन्य गांव भी प्रभावित हैं 

कमांड क्षैत्र ना केवल जातिय मनमुटाव  बल्कि क्षैत्रिय राजनेताओं की वोट बैंक की राजनीति के भेंट चढ़ा हुआ है । राजनेता वोट तो चाहते हैं लेकिन क्षैत्र के लिए पानी नहीं चाहते हैं ।राजनेता जीतना तो चाहते हैं लेकिन क्षैत्र की उन्नति नहीं चाहते ।और यही कारण है कि कमांड क्षेत्र आज भी लगभग 15 वर्षों से प्यासा है 

अगर समय रहते कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो हम ना केवल जमीन खोयेगे बल्कि हमे घर और गांव छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा क्योंकि" पलायन ही आखिरी पड़ाव है ।"

इसलिए आवश्यक है कि आपसी वार्तालाप करके या अन्य उचित मार्ग से शिघ्रातिशिघ्र पांचना नहर को खुलवाने के प्रयास करने चाहिए । ताकि इस बार रबी की फसलों को पांचना नहर का पानी मिल सके ।फिर से दोबारा मांड क्षैत्र में जनजीवन प्रफुल्लित हो सके। मानवजाति के साथ ही पशुपालन भी दोबारा जीवंत हो सके ।

राजनेताओं से पांचना नहर खुलवाने के विषय में सोचना रेगिस्तान में सुई ढूंढने के समान है इसलिए क्षैत्र के सर्वसमाज के बुद्धिजीवियों को आमसभा करके कोई त्वरित कार्रवाई करके उचित कदम उठाने चाहिए।

वैसे हम सोशल मीडिया की ताकत को आंवागढ प्रकरण में देख ही चुके हैं इसलिए  युवा साथियों को सोशल मिडिया के माध्यम से आवाज बुलन्द करनी चाहिए।


आभार 

राजीव बगलाई (Blog Writer)

Royal Rajasthan Tourism

My blog :- royalrajasthantourism.blogspot.com


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